Hanuman ji Se Sikhe 5+ Management Skills in 2021

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Hanuman ji Se Sikhe Management Skills:» पवन पुत्र हनुमानजी को तो आप सभी लोग भली भांति जानते है, पवनपुत्र हनुमानजी अपने मन, कर्म और वाणी के कारण आज भूलोक में जाने जाते है।

ज्ञान और बल बुद्धि के साथ साथ उनमें दयालुता भी फूट फूट कर भरी पड़ी थी। किसी भी कार्य को सही समय पर करना और उसे सफलता की ओर अंजाम देना उनका एक बेहतरीन और चमत्कारिक गुण था।

Hanuman ji Se Sikhe 5+ Management Skills in 2021

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चलिए आज की इस post में हम हनुमानजी के बारे में ही चर्चा करेंगे कि कैसे हनुमानजी इतने बलशाली और बुद्धि वाले थे ताकि हमें भी उनके सिद्धातों से कुछ सिखने का मौका मिल सके।

1. अनूठी कला:»

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हनुमान जी की कार्य करने की शैली सबसे निराली थी क्योंकि वे अपने कार्य में परिपक्व थे और किसी भी कार्य को बहुत ही अच्छी तरह से अंजाम देते थे।

हनुमानजी ने अपने अपनी बुद्धि से कर्म किया और बहुत ही अच्छे तरीके से सुग्रीव जी को श्रीराम जी से मिलवाया, हनुमानजी के बहादुरी और बुद्धि की प्रशंसा केवल यहीं तक सिमित नहीं थी बल्कि उन्होंने वो हर काम किया जो हनुमानजी ने उनको कहा।

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श्रीराम का हर कहा हुआ वादा सम्पूर्ण करना, हनुमानजी को एक बेहतरीन सेवक के रूप में निकलता है।

इसी के साथ अगर हम बात करें उनके management Skill के बारे में तो यह उनमें बेतरतीब था क्योंकि उन्होंने एक बहुत बड़ी वानर सेना से पुल का निर्माण करवाया था ये हमें सिखाता है कि हनुमानजी में Leadership की भी बहुत बड़ी कर्यक्षमता थी।

इससे ये बात सिद्ध होती है कि हनुमानजी में किसी भी काम को करने की एक अनूठी कला थी।

 

2. काम को सम्पूर्ण करने की निति:»

कहते है कि अगर किसी इंसान का सर हमसे उपर उठ जाए तो फिर उसके पांव धरती पर नहीं टिकते।

ऐसा ही कुछ सुग्रीव के साथ भी था जब सुग्रीव को सारा राज-पाट और स्त्री मिल गई तो उन्होंने श्रीराम जी से रिश्ता तोड़ लिया था परन्तु कहते है न।

होनी को कौन टाल सकता है।

हनुमानजी ने अपनी बल बुद्धि को दौड़ाया और अपने दिमाग का ऐसा चक्र चलाया कि सुग्रीव और श्रीराम जी को एक होना ही पड़ा।

3. सिखने की ललक:»

कई इंसान या बालक ऐसे है कि वे हमेशा ही हर किसी से कुछ न कुछ सीखते ही रहते है बिलकुल इसी पृवत्ति के हनुमानजी भी थे।

उन्होंने अपने जीवन में शुरुआत से लेकर अंत तक किसी न किसी व्यक्ति से कुछ न कुछ जरूर सीखा था।

इतिहास बताते है कि उन्होंने माता अंजनी और पिता केसरी के साथ-साथ धर्मपिता पवनपुत्र से भी निरंतर शिक्षा ग्रहण की थी। इन सभी के साथ उन्होंने पूजनीय भगवान सूर्यदेव से भी बहुमूल्य शिक्षा ग्रहण की थी।

4. सही प्लानिंग और दृढ़ता:»

अगर आप एक Business Planner या अपनी Life को plan करके चलते है तो आप इस बात को बहुत ही आसानी से समझ सकते है जिस प्रकार हनुमान जी को श्रीराम जी की दी हुई अंगूठी माता सीता तक पहुंचानी थी तो उन्हें इस बात का भली-भाँति पता था कि रस्ते में बहुत सी बाधाएं आने वाली है।

इसलिए उन्होंने पहले से ही सभी योजनाएं तैयार की और अपने काम को अंजाम दिया, इससे उन्होंने अपना कार्य पूर्ण ही नहीं बल्कि रावण को कड़ी चेतवानी भी दी और विभीषण को श्रीराम जी की और अग्रसर कर दिया।

इसके साथ-साथ जब रावण ने उनको दुतकारा तो उन्होंने किसी की भी परवाह न करते हुए पूरी लंका को तहस महस कर दिया।

हनुमानजी के इस प्रकार काम करने के रवैए जैसे कि माता सीता को अंगूठी पहुंचाना और विभीषण को श्रीराम की तरफ कर देना उनकी बुद्धि, सही योजना और काम करने की दृढ़ता को दर्शाता है।

5. हनुमानजी छुपेरुस्तम थे।

ये काफी अजीब सा अल्फ़ाज़ है कि हनुमान जी छुपे रुस्तम कैसे हो सकते है लेकिन ये बात बिलकुल सही है।

आपने बहुत से व्यक्तियों को देखा होगा कि वे कर कुछ और रहे होते है और उनका mind कहीं और चल रहा होता है।

बिलकुल इसी तरह के हनुमानजी भी थे, मान लो अगर हनुमानजी खेल रहे होते थे तो ऐसा बिलकुल नहीं था कि वो अपना पूरा ध्यान उसी खेल में लगा देते थे।

वे बहुत ही चतुराई से अपने हर काम को अंजाम देते थे और अपने हर शत्रु पर पैनी नजर रखते थे।

भले वे भोजन कर रहे होते थे या फिर शखाओं के साथ बातचीत, उनकी एक नजर तो उनके शत्रुओं पर ही रहती थी।

इससे हमें ये चीज सिखने को मिलती है कि कभी भी हमें एक काम में इतना ज्यादा लीन नहीं होना चाहिए कि हम अपने बाकी काम भी खराब कर बैठे।

इसलिए हनुमानजी इतने छुपेरुस्तम थे कि अपने हर शत्रु की खबर बहुत ही चतुराई के साथ रखते थे।

6. खुश रहने का मंत्र:»

अगर बात करें आज के युग कि तो हर कोई अपनी-अपनी परेशानियों की वजह से Stressed है किसी को शादी की चिंता है तो किसी को अपने घरवालों की, सभी अपनी-अपनी प्रॉबलम्स में उलझे हुए है।

लेकिन अंजनीपुत्र हनुमानजी के साथ ऐसा बिलकुल भी नहीं था वे हर समय अपने में मस्त रहते थे।

हनुमानजी किसी भी कार्य को करते वक़्त गंभीर नहीं रहे, उन्होंने अपना हर काम बहुत ही शांतिपूर्ण और सुलभ तरीके से परिपूर्ण किया।

अगर आपको हनुमान जी का लंका जाना या हो तो बहुत ही अच्छी बात है कैसे उन्होंने फाल खा-खा रावण को कड़ा संदेश दिया था।

इसी के साथ-साथ उन्होंने मस्ती-मस्ती में बहुत से घमंडियों का घमंड भी तोडा था।

हनुमानजी के खुश रहने की इस लीला से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हमें सदैव अपने कार्य को प्रशन्नता से करना चाहिए, भले उसके परिणाम हमारे पक्ष में हो या विपक्ष में।

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निष्कर्ष:»

So…friends ये थी हनुमान जी से जुड़ी 5+ ( Hanuman ji Se Sikhe Management Skills) अनोखी बातें जो उन्हें किसी भी देव और भूलोक पर रह रहे इंसानों से अलग बनाती है।

अगर आपके अंदर भी ये भी क्षमताएं है तो बहुत ही अच्छी बात है और अगर आप इन्हें अम्ल में लाने के बारे में सोच रहे है तो आपने बहुत ही अच्छा फैसला किया है।

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं:» विजयी भव 🙂

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